जब जो आप देखते हैं वह समझ नहीं आता, तब दिमाग कैसे काम करता है?

जब जो आप देखते हैं वह समझ नहीं आता, तब दिमाग कैसे काम करता है?

कभी-कभी हम जो देखते हैं, वह तुरंत समझ नहीं आता। उदाहरण के लिए, कोई परछाईं पल भर के लिए चेहरा जैसी लग सकती है या किसी वस्तु को गलत समझा जा सकता है। हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च बताती है कि हमारा दिमाग इन विजुअल कन्फ्लिक्ट (दृश्य संघर्ष) को सुलझाने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाता है, जिसमें दिमाग के अलग-अलग हिस्से अपनी व्याख्याओं की तुलना करते हैं जब तक कि एक सुसंगत तस्वीर सामने न आ जाए।

कन्फ्लिक्ट और कंसेंसस बिल्डिंग मैकेनिज्म

Nature Neuroscience जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, Cold Spring Harbor Laboratory की फेलो मित्रा जावदज़ादेह (Mitra Javadzadeh) और यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैम्ब्रिज तथा यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के सहयोगियों ने जांच की कि विजुअल कॉर्टेक्स के दो पड़ोसी क्षेत्र कैसे परस्पर संवाद करते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब इन दोनों क्षेत्रों की गतिविधियां आपस में मिलती थीं, तो वह साझा पैटर्न बना रहता था। हालांकि, जब दोनों क्षेत्रों से कॉन्फ्लिक्टिंग पैटर्न पैदा होते थे, तो वह असहमति एक सेकंड के एक अंश के भीतर फीकी पड़ जाती थी।

शोधकर्ताओं का सुझाव है कि समय के साथ क्षेत्रों के बीच के ये कनेक्शन एक ऐसा मैकेनिज्म लागू करते हैं जिसे ‘consensus building’ कहा जा सकता है। यह प्रक्रिया यह समझाने में मदद कर सकती है कि कैसे दिमाग कई विशेष इनपुट को एक एकीकृत और सुसंगत दृष्टिकोण में बदल देता है।

म्यूचुअल कोऑर्डिनेशन और एनिमल मॉडल टेस्टिंग

दिमाग के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग सेंसरी जानकारी को प्रोसेस करते हैं, फिर भी दुनिया का हमारा अनुभव बिखरा हुआ न होकर आमतौर पर एकीकृत महसूस होता है। इस बात को समझने के लिए कि ये विशेष सिस्टम कैसे तालमेल बिठाते हैं, वैज्ञानिकों ने चूहों पर परीक्षण किया। उन्होंने चूहों को विपरीत दिशाओं में झुके दो विजुअल पैटर्न के बीच अंतर करना सिखाया।

प्रयोग के दौरान, टीम ने V1 (primary visual cortex) या LM (lateromedial visual area) में से किसी एक को अस्थायी रूप से चुप कर दिया और देखा कि बिना अपने सामान्य साथी के दूसरा क्षेत्र कैसे व्यवहार करता है। इन अवलोकनों के आधार पर, टीम ने V1-LM सर्किट का एक आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क मॉडल तैयार किया, जिससे यह परीक्षण किया जा सके कि सिस्टम कैसे प्रतिक्रिया देता है।

भविष्य की संभावनाएं और एआई पर प्रभाव

हालांकि इस अध्ययन में केवल दृष्टि से जुड़े दो क्षेत्रों की जांच की गई, लेकिन शोधकर्ता अब यह जांच कर रहे हैं कि क्या यही प्रक्रिया पूरे नियोकॉर्टेक्स (neocortex) में अधिक व्यापक रूप से काम करती है। उदाहरण के लिए, जब आप जो देखते हैं वह आपके सुनने से मेल नहीं खाता, तो क्या आप उन दोनों में तालमेल बिठाने के लिए इसी तरह के तंत्र का उपयोग करते हैं?

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह गतिशील कंसेंसस बिल्डिंग व्यापक पाई जाती है, तो यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम को भी यह समझने में मदद कर सकती है कि वे परस्पर विरोधी सूचना धाराओं को कैसे संभालें और किन सिग्नलों पर भरोसा करें।