वैज्ञानिकों ने प्राचीन उल्कापिंडों (meteorites) के अध्ययन से एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। नए शोध के अनुसार, हमारे सोलर सिस्टम (Solar System) की शुरुआत के पहले 200,000 वर्षों के दौरान यहाँ एक बेहद शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) मौजूद था। इस खोज से पता चलता है कि गुरुत्वाकर्षण (gravity) के साथ-साथ चुंबकत्व ने भी गैस और धूल के विशाल बादलों को सूर्य और ग्रहों की डिस्क में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी।
प्राचीन उल्कापिंडों और CAI grains का अध्ययन
लगभग 4.6 अरब साल पहले, सौर मंडल की शुरुआत गैस और धूल के एक विशाल बादल के रूप में हुई थी, जिसे ‘सोलर नेबुला’ (solar nebula) कहा जाता है। समय के साथ यह बादल सिकुड़कर एक डिस्क में बदल गया, जिससे केंद्र में सूर्य और उसके आसपास ग्रहों का निर्माण हुआ। अब तक वैज्ञानिक इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य कारण केवल गुरुत्वाकर्षण को मानते थे।
हालांकि, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने अंटार्कटिका में 2008 में खोजे गए एक प्राचीन उल्कापिंड (DOM 08006) के अंदरूनी सूक्ष्म कणों का अध्ययन किया। इन कणों को कैल्शियम-एल्यूमीनियम-समृद्ध इनक्लूजन या CAI कहा जाता है, जो सौर मंडल के शुरुआती 200,000 वर्षों के दौरान बने थे और इस काल की सबसे पुरानी ज्ञात सामग्री माने जाते हैं।
पृथ्वी से भी मजबूत था शुरुआती चुंबकीय क्षेत्र
शोधकर्ताओं ने पाया कि इन खनिजों में प्राचीन चुंबकत्व के निशान सुरक्षित हैं। इन मापों के आधार पर टीम का अनुमान है कि शुरुआती सौर मंडल में लगभग 150 से 600 माइक्रोस्ला (microteslas) का चुंबकीय क्षेत्र था। यह आज के समय में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से लगभग तीन से बारह गुना अधिक मजबूत है।
MIT के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह मजबूत चुंबकीय क्षेत्र प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क (protoplanetary disk) के माध्यम से गैस को केंद्रीय तारे यानी सूर्य की ओर खींचने में मदद कर रहा होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि हमें सूर्य और ग्रहों के गठन को पूरी तरह समझना है, तो हमें गुरुत्वाकर्षण के साथ-साथ चुंबकीय क्षेत्रों को भी इसके महत्वपूर्ण घटकों में शामिल करना होगा।
