खगोलविदों ने अंतरिक्ष में एक ऐसी अनोखी घटना की खोज की है जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के बहुत बड़े टेलीस्कोप (VLT) का उपयोग करके शोधकर्ताओं ने एक मृत तारे के चारों ओर एक शक्तिशाली शॉक वेव का पता लगाया है, जो वर्तमान वैज्ञानिक समझ के अनुसार अस्तित्व में नहीं होनी चाहिए थी। ScienceDaily पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान के मौजूदा सिद्धांतों को चुनौती देती है।
मृत तारे और रहस्यमयी ‘बाउ शॉक’ की बनावट
यह मृत तारा, जिसे RXJ0528+2838 नाम दिया गया है, पृथ्वी से लगभग 730 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। यह एक व्हाइट ड्वार्फ (White Dwarf) है, जो किसी मरते हुए कम द्रव्यमान वाले तारे का बचा हुआ क्रोड होता है और इसके साथ एक सूर्य जैसा साथी तारा भी परिक्रमा करता है। जब यह तारा अंतरिक्ष में यात्रा करता है, तो यह आसपास की गैस से टकराकर एक ‘बाउ शॉक’ (Bow Shock) नामक शॉक वेव बनाता है। डरहम यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक सिमोन स्कारिंगी ने बताया, "हमने कुछ ऐसा पाया है जो पहले कभी नहीं देखा गया और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी तरह से अप्रत्याशित था।" ScienceDaily
डिस्क की अनुपस्थिति और ‘मिस्ट्री इंजन’ का सवाल
सामान्य तौर पर, ऐसे बाइनरी सिस्टम में साथी तारे से सामग्री खींचकर व्हाइट ड्वार्फ के चारों ओर एक डिस्क बनाई जाती है, जो इस तरह के आउटफ्लो को ईंधन देती है। हालांकि, RXJ0528+2838 के मामले में खगोलविदों को किसी भी डिस्क का कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बावजूद, यह प्रणाली कम से कम 1,000 वर्षों से शक्तिशाली आउटफ्लो और शॉक वेव बनाए हुए है। वारसॉ, पोलैंड स्थित निकोलस कोपर्निकस खगोलीय केंद्र के पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता और सह-लेखक क्रिस्टियन इल्कीविच ने कहा, "हमारे अवलोकन एक शक्तिशाली आउटफ्लो का खुलासा करते हैं, जो हमारी वर्तमान समझ के अनुसार वहां नहीं होना चाहिए था।" ScienceDaily
चुंबकीय क्षेत्र की भूमिका और आगे की अनुसंधान योजनाएं
शोधकर्ताओं का मानना है कि तारे का मजबूत चुंबकीय क्षेत्र इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सुराग हो सकता है, जो डिस्क के बिना भी सामग्री को सीधे व्हाइट ड्वार्फ तक पहुँचा रहा है। हालांकि, वर्तमान चुंबकीय क्षेत्र केवल कुछ सौ वर्षों तक ही इस शॉक वेव को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है, जिससे यह संकेत मिलता है कि यहाँ कोई छिपा हुआ ऊर्जा स्रोत या ‘मिस्ट्री इंजन’ काम कर रहा है। वैज्ञानिक अब भविष्य में आने वाले ESO के एक्सट्रीमली लार्जर टेलीस्कोप (ELT) से इस रहस्य को और अधिक गहराई से समझने की उम्मीद कर रहे हैं। ScienceDaily
