Hubble Observations Reveal Massive Star Secrets Behind Early Galaxies

ब्रह्मांड के शुरुआती आकाशगंगाएं (galaxies) इतनी अजीब और अलग क्यों दिखती हैं, इस गुत्थी को सुलझाने की दिशा में खगोलविदों को एक अहम सफलता मिली है। यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा (University of Utah) के नेतृत्व में किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि कम धातु (metal-poor) वाली बौनी आकाशगंगाओं में विशाल तारे (massive stars) किस तरह व्यवहार करते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, अत्यंत कम मेटेलिटी पर इन तारों की स्टेलर विंड्स (stellar winds) तेजी से कमजोर हो जाती हैं।

TEMPOS कार्यक्रम और हबल टेलीस्कोप

यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा की अगुवाई में इस प्रोजेक्ट को Treasury of Extremely Metal-Poor O Stars (TEMPOS) नाम दिया गया है। इस सर्वेक्षण में हबल स्पेस टेलीस्कोप (Hubble Space Telescope) के कॉस्मिक ओरिजिन स्पेक्टrograph (COS) से प्राप्त पराबैंगनी (UV) माप का उपयोग किया गया। शोधकर्ताओं ने छह स्थानीय बौनी आकाशगंगाओं में फैले 29 विशाल तारों का अध्ययन किया। इन आकाशगंगाओं की मेटेलिटी सूर्य के एक-पाँचवें हिस्से से भी कम है, जिससे ये शुरुआती ब्रह्मांड की परिस्थितियों को समझने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।

स्टेलर विंड्स में भारी गिरावट

अध्ययन की मुख्य लेखिका और यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा के भौतिकी एवं खगोल विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर ग्रेस टेलरफोर्ड (Grace Telford) ने बताया कि जैसे-जैसे मेटेलिटी कम होती है, स्टेलर विंड्स की गति सामान्यतः कम हो जाती है। हालांकि, सबसे कम मेटेलिटी वाले स्तर पर शोधकर्ताओं ने एक अप्रत्याशित और तेज गिरावट दर्ज की। सूर्य की मेटेलिटी के लगभग 10 प्रतिशत से कम वाले तारों में हवा की गति में यह गिरावट काफी तेज थी।

“वहाँ एक तरह का सहज रुझान था और फिर अचानक सबसे कम मेटेलिटी वाले तारों के लिए हवा की गति वास्तव में गिर जाती है,” ग्रेस टेलरफोर्ड ने कहा।

आयरन और शुरुआती ब्रह्मांड की पहेली

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कम मेटेलिटी वाले इन तारों में आयरन (iron) की मात्रा में काफी भिन्नता हो सकती है। आयरन स्टेलर विंड्स और सुपरनोवा विस्फोटों (supernova explosions) में एक महत्वपूर्ण घटक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन डेटा और भविष्य के Keck Observatory के अवलोकनों को मिलाकर शुरुआती ब्रह्मांड और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) द्वारा खोजी गई जटिल आकाशगंगाओं के मॉडलों को और बेहतर बनाया जा सकेगा।