हाल ही में सामने आए एक बड़े मेडिकल अध्ययन (Medical Study) में नींद के पैटर्न और लंबी अवधि के स्वास्थ्य के बीच एक गहरा संबंध पाया गया है। PLOS Medicine जर्नल में प्रकाशित इस नए शोध के अनुसार, जिन लोगों को अधिक REM sleep मिलती है, उनमें 83 बीमारियों का खतरा काफी कम देखा गया है। इसमें डिमेंशिया (dementia), हार्ट फेलियर (heart failure) और पार्किंसंस रोग (Parkinson’s disease) जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं।
95,000 से अधिक लोगों पर हुआ शोध
इस रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने UK Biobank के 95,559 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया। इन लोगों ने सात दिनों और रातों तक कलाई पर एक्सेलेरोमीटर (wrist accelerometers) पहने थे। इसके जरिए नींद के चरणों (REM, deep, और light sleep), कुल नींद की अवधि और नींद की अनियमितता का आकलन करने के लिए एक डीप-लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग किया गया। प्रतिभागियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का लगभग 8.9 वर्षों की औसत अवधि तक फॉलो-अप किया गया।
REM और Deep Sleep का स्वास्थ्य पर असर
अध्ययन के परिणामों से पता चलता है कि अधिक REM sleep मिलने से 83 बीमारियों का जोखिम कम होता है। उदाहरण के लिए, हार्ट फेलियर के लिए hazard ratio 0.74, डिमेंशिया के लिए 0.54 और पार्किंसंस रोग के लिए 0.20 दर्ज किया गया। वहीं दूसरी ओर, अधिक deep sleep (गहरी नींद) टाइप 2 डायबिटीज और मेजर डिप्रेशन जैसी 7 स्थितियों के कम जोखिम से जुड़ी पाई गई। इसके विपरीत, नींद में ज्यादा अनियमितता और सोने के बाद जागने की स्थिति (wakefulness after sleep onset) चिंता और सब्सटेंस यूज डिसऑर्डर जैसी समस्याओं के बढ़ते जोखिम से जुड़ी पाई गई।
नींद की अवधि और सीमाएं
कुल नींद की अवधि (Total sleep duration) का बीमारियों के जोखिम के साथ एक नॉन-लाइनर संबंध देखा गया, जिसमें 6 से 8 घंटे की नींद की विंडो में सबसे कम जोखिम केंद्रित था। 5 घंटे से कम सोने वाले लोगों को सबसे अधिक क्लिनिकल वल्नरेबिलिटी का सामना करना पड़ा और उनमें 37 बीमारियों का खतरा बढ़ा हुआ पाया गया। हालांकि, यह एक ऑब्जर्वेशनल स्टडी है, इसलिए यह शोध यह सीधे तौर पर स्थापित नहीं करता है कि नींद के पैटर्न से ही सीधे बीमारियां होती हैं। लेखकों का कहना है कि 6 से 8 घंटे की नींद मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों के लिए एक स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में कार्य कर सकती है।
